بسکه بیروپت بهارم کلفت انشا میکند
بسکه بیروپت بهارم کلفت انشا میکند
چون حنا رنگ از گرانی سایه پیدا میکند
басака бе-рупат бҳорм-калафт анашо мекунад
чун ҳано ранг аз гарони сойа пидо мекунад
گر نه باد صبح چین طرهات وا میکند
نسخهٔ جمعیت ما را که اجزا میکند
гар на бод субҳ чин тара-ат во мекунад
насаха ҷамаъит мо ро ки аҷазо мекунад
عضو عضومبسکه میبالد به سودای جنون
وسعت دامان داغ ایجاد صحرا می کند
ъазу ъазум-басака мӣ-болд ба судой ҷанун
васаъат домон доғ айаҷод саҳаро мӣ канд
همت !ز تدبیر بیجا تاکجا خجلتکشد
ای جنون رحمی که ما را هوش رسوا میکند
ҳамат!з тадабир биҷо токаҷо хаҷалат-кашад
эй ҷанун раҳами ки мо ро ҳуш расаво мекунад
نسخهٔ هستی ز بس دقت سواد افتاده است
چشم برهم بسته حل این معما میکند
насаха ҳастӣ з бас дақат савод афтода аст
чашм бараҳам баста ҳал ин маъамо мекунад
جنس درد بیکسی کم نیست در بازار ما
گر شنیدن مایه دارد ناله سودا میکند
ҷанас дард бикаси-кам нест дар бозор мо
гар шанидан мойа дорад нола судо мекунад
جلوه از شوخی نقاب حیرتی افکنده است
رنگ صهبا در نظرها کار مینا میکند
ҷалуа аз шухи-нқоб ҳирти афаканда аст
ранг саҳабо дар назараҳо кор мино мекунад
دیده ما را خمار شوخی رفتار او
عاقبت خمیازه ای نقش کف پا میکند
дида мо ро хамор шухи рафтор ав
ъоқабат хамиоза-эй нақш каф по мекунад
چون شود بیحاصلی معلوم مطلب حاصلست
حاجت ما را روا نومیدی ما میکند
чун шуд биҳосали маъалум маталаб ҳосал-ст
ҳоҷат мо ро раво нумиди мо мекунад
گر چنین بالد هوای پر فشانیهای شوق
آه ما را ربشهٔ تخم ثریا میکند
гар чанин болд ҳавой пур фашониҳой шуқ
о мо ро рабаша-тахам сарио мекунад
در شکست آرزو تعمیر آزادی گم است
بال چون بر هم خورد پرواز پیدا می کند
дар шакаст орзу таъамир озоди-гам аст
бол чун бар ҳам хурд паравоз пидо мӣ канд
سنگ بر تدبیر زن، کار کس اینجا بسته نیست
یک شکستن صد کلید از قفل انشا میکند
санг бар тадабир зн,кор кас инҷо баста нест
як шакастан сад калид аз қафал анашо мекунад
رهبر مقصود بیدل وحشت از خویش است و بس
سیل چون مطلق عنان شد سیر دربا میکند
раҳабар мақасуд бидел вҳашт аз хеш-аст-ва бас
сил чун маталқ ъанон шуд сир дарабо мекунад
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- نقش
- تصویر و اثر؛ گاه صورت ظاهری در برابر حقیقت.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- شکست
- درهمشکستگی؛ نمادِ نیستی و فروریختنِ خودیِ عاشق.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.
- داغ
- نشان سوختگی یا زخم؛ کنایه از اندوه، عشق و حسرت.
- بال
- پرِ پرواز؛ نمادِ اوجگرفتن و رهاییِ روح.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.
- پرواز
- اوجگرفتن در هوا؛ نمادِ رهاییِ روح و آرزو.
- دیده
- چشمِ بیننده؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و دیدارِ یار.