آن فتنه که آفاقش شور من و ما باشد
آن فتنه که آفاقش شور من و ما باشد
دل نام بلایی هست یارب به کجا باشد
он фитна-ки офоқаш шур ман ва мо бошад
дил ном балойай ҳаст йораб ба-каҷо бошад
بابد به سراب اینجا از بحر تسلی بود
نزدیک خود انگارید گر دورنما باشد
бобд ба сароб инҷо аз баҳар тасали буд
наздик худ ангорид гар дуранамо бошад
راحتطلبی ما را چون شمع به خاک افکند
این آرزوی نایاب شاید تنه پا باشد
роҳат-талаби мо ро чун шамъ ба хок афаканд
ин оразавай нойоб шойд тана по бошад
گویند ندارد دهر جزگرد عدم چیزی
آن جلوه که ناپیداست باید همه جا باشد
гавайанд надорад даҳар ҷазагард ъадам чизи
он ҷалуа ки нопидост бойд ҳама ҷо бошад
بیپیرهن از یوسف بویی نتوان بردن
عریانی اگر باشد در زیر قبا باشد
бе-пираҳан аз йавасаф бавайай натавон бардан
ъариони агар бошад дар зир қабо бошад
زیر و بم جرات نیست در ساز حباب اینجا
غرق عرق شرمیم ما را چه صدا باشد
зир ва бам ҷарот нест дар соз ҳабоб инҷо
ғарақ ъарақ шармим мо ро ча садо бошад
کم نیست کمال فقر از دام هوس رستن
بگذار که این پرواز در بال هما باشد
кам нест камол фақар аз дом ҳус растан
багазор ки ин паравоз дар бол ҳамо бошад
اندیشهٔ خودبینی از وضع ادب دور است
آیینه نمیباشد آنجا که حیا باشد
андиша-ходабини аз вазаъ адаб дур аст
оина нами-бошад онҷо ки ҳио бошад
با طبع رعونتکیش زنهار نخواهی ساخت
باید سر گردنخواه از دوش جدا باشد
бо табаъ раъунат-киш занаҳор нхоҳи сохт
бойд сар гардан-хо аз душ ҷадо бошад
اشکی که دمید از شمع غیرت ته پایش ریخت
کاش آب رخ ما هم خاک ذر ما باشد
ашаки-ки дамид аз шамъ ғирт та пойаш рихт
кош об рх мо ҳам хок зар мо бошад
تحقیق ندارد کار با شبههتراشیها
در آینهٔ خورشید تمثال خطا باشد
таҳақиқ надорад кор бо шабҳа-тароши-ҳо
дар оина хурашид тамасол хто бошад
اجزای جهان کل کیفیت کل دارد
هر قطره که در دریاست باشد همه تا باشد
аҷазой ҷаҳон кал кифит-кал дорад
ҳар қатара ки дар дариост бошад ҳама то бошад
هرچند قبولت نیست بیدل ز طلب مگسل
بالقوهٔ حاجتها در دست دعا باشد
ҳарачанд қабулат нест бидел з талаб магасал
болқуа ҳоҷат-ҳо дар даст даъо бошад
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- جهان
- گیتی و دنیا؛ سرای گذرا و فریبندهٔ هستی.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- بال
- پرِ پرواز؛ نمادِ اوجگرفتن و رهاییِ روح.
- پرواز
- اوجگرفتن در هوا؛ نمادِ رهاییِ روح و آرزو.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.