بینشان حسنی که درس جلوه میخواند ز من
بینشان حسنی که درس جلوه میخواند ز من
عالمی بر هم زند تا رنگ گرداند ز من
бе-нашон ҳасани-ки дарс ҷалуа мӣ-хонд з ман
ъолми бар ҳам занд то ранг-гардонд з ман
نور غیر ازکسوت عریانی خورشید نیست
چشم بند است اینکه او خود را بپوشاند ز من
нур ғир азакасут ъариони хурашид нест
чашм банд аст айанака ав худ ро бапушонд з ман
آبیار مزرع خاموشیام اما چه سود
شوق میکارد نفس تا ناله رویاند ز من
обиор мазараъ хомуши-ам амо ча суд
шуқ мӣ-корд нафас то нола равайонд з ман
شهپر عنقاست موج جوهر آیینهام
مزد آن صیقل که تمثالی بخنداند ز من
шаҳапар ъанқост мавҷ ҷуҳар оинаам
мазд он сиқал-ки тамасоли бахандонд з ман
بر غبار الفت این دشت دست افشاندهام
یأس میترسم جنون را هم برون راند ز من
бар ғубор алафт ин дашт даст афашонда-ам
йос мӣ-тарсам ҷанун ро ҳам барун ронд з ман
هیچ صبح از عهدهٔ شامم نمیآید برون
داغ نومیدی مگر خورشید جوشاند ز من
ҳич субҳ аз ъаҳада шомам нами-ойд барун
доғ-нумиди магар хурашид ҷушонд з ман
نخل یٱس از سوختنها دارد امید بهار
کاش بیبرگی پر پروانه رویاند ز من
нахал йос аз сухатанаҳо дорад амид бҳор
кош бе-бараги пур паравона равайонд з ман
داغ شد از خجلت بنیاد من سیل فنا
آنقدر گردی نمییابد که بنشاند ز من
доғ шуд аз хаҷалат баниод ман сил фано
онақадар гарди нами-йобд ки банашонд з ман
سایه داران! به که دیگر بر ندارم سر ز خاک
تا توانایی دل موری نرنجاند ز من
сойа дор-ан! ба-ки дигар бар ндорм сар з хок
то тавонойай дил мури нарнаҷонд з ман
چون حباب آیینهام چشمیست آنهم بینگاه
آه از آن روزی که حیرت دامن افشاند ز من
чун ҳабоб оинаам чашми-ст онаҳам бе-нго
о аз он рузи-ки ҳайрат доман афашонд з ман
در مقامی که امتحان گیرد عیار اعتبار
مایه تمثالیست گر آیینه بستاند ز من
дар мақоми ко-матаҳон гирд ъиор аъатабор
мойа тамасоли-ст гар оина бастонд з ман
تا نجوشد سرمه از خاکستر من چون سپند
خامشی را هم محبت ناله میداند ز من
то нҷушад сарма аз хокастар ман чун сапанд
хомаши ро ҳам муҳаббат нола мӣ-донд з ман
بیدلم بیدل ز شرم سخت جانیها مپرس
دور از آن در، خاک هم آب است اگر ماند ز من
бидалм бидел з шарм сахт ҷониҳо мапарс
дур аз он дар, хок ҳам об аст агар монд з ман
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- غبار
- گرد و خاک؛ نشانه محوی، فروتنی، ناپایداری یا حجاب دیدن.
- موج
- برآمدگی آب؛ در شعر نشانه جنبش، اضطراب و ناپایداری.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- دامن
- کنارهٔ جامه؛ نمادِ پاکی، پناه و دستآویز.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.