تا ز حسن وگلستان تماشا رنگ داشت
تا ز حسن وگلستان تماشا رنگ داشت
حیرت از آیینهام دستی به زیر سنگ داشت
то з ҳасан вагаластон тамошо ранг дошт
ҳайрат аз оинаам дасти ба зир санг дошт
یاد آن عیشی که از نیرنگ جولانکسی
گرد من در پرده چون صبح بهارانرنگ داشت
йод он ъиши-ки аз ниранг ҷавлон-каси
гард ман дар парда чун субҳ бҳорон-ранг дошт
تا نفس بال فغان زد رنگ صحرا ریخت دل
عمرها این شمع خامش کلبهام را تنگ داشت
то нафас бол фағон зд ранг саҳаро рихт дил
ъамараҳо ин шамъ хомаш-калаба-ам ро танг дошт
کامرانیها بالا شد ورنه از بیحاصلی
دست برهم سودهٔ من دامنی در چنگ داشت
комарониҳо боло шуд варна аз биҳосали
даст бараҳам суда ман домани дар чанг дошт
آب میگشتیم کاش از عرض صافیهای دل
کان تنزه جلوه از آیینهداران ننگ داشت
об мӣ-гаштим кош аз ъарз софиҳой дил
кон таназа ҷалуа аз оина-дорон нанг дошт
ترک تمکین جوهر ادراک ما بر باد داد
آتش ما اعتبار آبرو در سنگ داشت
тарак тамакин ҷуҳар адарок мо бар бод дод
оташ мо аъатабор обару дар санг дошт
عشق هم دارد تلافیها که چون مینای می
هرقدر خون بود در دل چهرهٔ ما رنگ داشت
ишқ ҳам дорад талофиҳо-ки чун миной мӣ
ҳарақадар хон буд дар дил чаҳара мо ранг дошт
تا کی از شرم تماشا بایدمگردید آب
ای خوش آن آیینهکز هستی نقاب زنگ داشت
то ки аз шарм тамошо бойадам-гардид об
эй хош он оина-каз ҳастӣ нқоб занг дошт
بسکه ما بیچارگان آفت نصیب افتادهایم
رنگ ما بشکست اگر دل با تپیدن جنگ داشت
басака мо бичорагон офт насиб афтода-айам
ранг мо башакаст агар дил бо тапидан ҷанг дошт
منفعل از دعوی نشو و نمای هستیام
ساز من در خاک بیدل بیش ازین آهنگ داشت
манафаъал аз даъавай нашу ва намой ҳастӣ-ам
соз ман дар хок бидел биш азин оҳанг дошт
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- بال
- پرِ پرواز؛ نمادِ اوجگرفتن و رهاییِ روح.
- عشق
- مهرِ سوزان؛ نیرویِ بنیادینِ هستی و راهِ فنا.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- حیرت
- سرگشتگی آگاهانه در برابر حقیقتی که فهم عادی از آن بازمیماند.