بازم از شرم سجود امشب عرق بیتاب شد
بازم از شرم سجود امشب عرق بیتاب شد
لآستان او به یاد آمد جبیبم آب شد
бозм аз шарм саҷуд амашаб ъарақ битоб шуд
лостон ав ба йод омад ҷабибам об шуд
تا قیامت بر نمیآیم ز شرم ناکسی
داشتم گرد سرش گردیدنی گرداب شد
то қиёмат бар нами-ойам з шарм нокаси
дошатам гард сараш гардидани гардоб шуд
عجز بردیم و قبول بار رحمت بافتیم
آنچه اینجا کاسد ما بود آنجا باب شد
ъаҷаз бардим ва қабул бор раҳамат бофтим
онача инҷо косад мо буд онҷо боб шуд
حرص پهلوها تهی کرد ازحضور بوریا
در خیالخوب مخمل عالمی بیخواب شد
ҳарс паҳалуҳо таҳи-кард азаҳазур бурио
дар хаёл-хоб махамал ъолми бихоб шуд
آنقدرها نیست این پست و بلند اعتبار
صنع تصحیفی است گر بواب ما نواب شد
онақадараҳо нест ин паст ва баланд аъатабор
санаъ-тасаҳифи аст-гар бавоб мо навоб шуд
تا قوا سستی ندارد این تعلقها بجاست
با گسستن بست پیمان رشته چون بیتاب شد
то қаво састи надорад ин таъалқаҳо баҷост
бо гасастан баст-пимон рашта чун битоб шуд
گر گذشتن شد بقین بگذر ز تدبیر جسد
فکر کشتی چیست هرگاه آبها پایاب شد
гар газаштан шуд бақин багазар з тадабир ҷасад
факар кашти чист ҳараго обҳо пойоб шуд
دانه مهری بود بر طومار وهم شاخ و برک
دل ز جمعیتگذشت و عالم اسباب شد
дона маҳари буд бар тумор ваҳм шох ва барак
дил з ҷамаъит-газашт ва олам асабоб шуд
زندگی گر عبرت آهنگ همین شور و شر است
چون نفس نتوان به ساز ما و من مضراب شد
зандаги-гар ъабарт-оҳанг ҳамин-шур ва шар аст
чун нафас натавон ба соз мо ва ман мазароб шуд
خاک گردیدبم اما رمز دل نشکافتیم
در پی این دانه چندین آسیا بیآب شد
хок гардидабам амо рамаз дил нашакофтим
дар пи ин дона чандин осио бе-об шуд
جستجوی رفتگان سر بر هوا کردیم حیف
پیش ما بود آنچه ما را در نظر ناباب شد
ҷастаҷавай рафтагон сар бар ҳаво кардим ҳиф
пиш мо буд онача мо ро дар назар нобоб шуд
قامتت خم گشت بیدل ناگزیر سجده باش
ناتوانی هر کجا بیپرده شد محراب شد
қоматат хам-гашт бидел ногазир саҷада бош
нотавони ҳар каҷо бе-парда шуд маҳароб шуд
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- خیال
- صورت ذهنی و وهم؛ جهان تصور در برابر حضور عینی.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- گرد
- غبار و خاک؛ نشانه محوی، ناپایداری و حجاب دیدن.
- وهم
- پندار ناپایدار؛ ادراکی که یقین و حقیقت کامل نیست.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.
- نظر
- نگاه و دیدن؛ توجهِ معشوق یا بصیرتِ باطن.
- یاد
- بهخاطرآوردن؛ حضورِ معشوق در دل و ذکرِ پیوسته.
- خم
- خمیدگی یا خمِ شراب؛ منبعِ مستی و فیضِ معنوی.