شور گمگشتگیام زد به در رسوایی
شور گمگشتگیام زد به در رسوایی
حیف همت که شود منفعل عنقایی
шур гамагаштаги-ам зд ба дар расавойай
ҳиф ҳамат-ки шуд манафаъал ъанқойай
ننگ هوش است که چون عکس درین دشت سراب
آب آیینه کند کشتی کس دریایی
нанг ҳуш-аст ки чун ъакас дарин дашт сароб
об оина-канд кашти-кас дариойай
خلقی از لاف جنون شیفتهٔ آگاهیست
تو به خمیازه مبر عرض قدح پیمایی
халқи аз лоф ҷанун шифта огоҳист
ту ба хамиоза мабар ъарз қадаҳ пимойай
شمع با ماندنش از خویش گذشت آخر کار
پشت پای است ز سر تا به قدم بیپایی
шамъ бо монаданаш аз хеш-газашт охар кор
пашт пой аст з сар то ба қадам бе-пойай
در مقامی که نفس نعل در آتش دارد
خنده میآیدم از غفلت بیپروایی
дар мақоми-ки нафас наъал дар оташ дорад
ханда мӣ-ойадам аз ғафалат бе-паравойай
یاد آن قامت رعنا به تکلف نکنی
که مبادا روی از خویش و قیامت آیی
йод он қомат раъано ба такалаф накани
ки мабодо равай аз хеш ва қиёмат ойай
حسرت باده کشی نیست کم از آتش صور
کوهها رفت به باد از هوس مینایی
ҳасарт бода-каши нест кам аз оташ сур
куҳаҳо рафт ба бод аз ҳус минойай
سعی مطرب نشود چاره گر کلفت دل
این گره نیست که ناخن زنی و بگشایی
саъи матараб нашуд чора-гар калафт дил
ин-гара нест-ки нохан зни ва багашойай
شور هنگامهٔ افلاک و خروش دل خاک
بی صدا تر ز دو دست است چو بر هم سایی
шур ҳангома афалок ва харуш дил хок
би садо тар з ду даст аст чу бар ҳам сойай
حرف عشق انجمن آرای خروشست اینجا
بند نی گردد اگر لب بهم آرد نایی
ҳарф ишқ анаҷаман орой харушаст инҷо
банд ни-гардад агар лаб баҳам орд нойай
خواب در دیدهٔ ارباب قناعت تلخ است
بوریا گر نکند مخملی و دیبایی
хоб дар дида арабоб қаноъат талх аст
бурио гар наканд махамали ва дибойай
هیچ جا نیست تهی جای به هم جوشیدن
شش جهت عالم عنقاست پر از تنهایی
ҳич ҷо нест таҳи ҷой ба ҳам ҷушидан
шаш ҷаҳат олам ъанқост пур аз танаҳойай
شعله را جز ته خاکسترش آرام کجاست
جهد آن کن که تو در سایهٔ خویش آسایی
шаъала ро ҷуз та хокастараш ором-каҷост
ҷаҳад он кан ки ту дар сойа хеш осойай
بیدل این ما و منت حایل آثار صفاست
نفسی آینه باشی که نفس ننمایی
бидел ин мо ва манат ҳойал осор сафост
нафаси оина боши-ки нафас нанамойай
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- عشق
- مهرِ سوزان؛ نیرویِ بنیادینِ هستی و راهِ فنا.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.