زخمی به دل از دست نگارین تو دارم
زخمی به دل از دست نگارین تو دارم
یارب که شود برگ حنا سنگ مزارم
захами ба дил аз даст нгорин ту дорм
йораб-ки шуд бараг ҳано санг мазорм
آیینه جز اندیشهٔ دیدار چه دارد
گر من به خیال تو نباشم به چهکارم
оина ҷуз андиша дидор ча дорад
гар ман ба хаёл ту набошм ба ча-корм
هر چند به راه طلب افتادهام از پا
ننشسته چو نقش قدم آبله دارم
ҳар чанд ба ро талаб афтода-ам аз по
нанашаста-чу нақш қадам обала дорм
آغوش هوس تفرقهٔ وضع حضور است
چون غنچه اگر جمع شودگل به کنارم
оғуш ҳус тафарақа вазаъ ҳазур аст
чун ғанача агар ҷамаъ шудагал ба-канорм
دادهست به باد تپشم حسرت دیدار
آیینه چکدگر بفشارند غبارم
дода-ст ба бод тапашм ҳасарт дидор
оина чакадагар бафашоранд ғаборм
چون نخل سر و برگ غرورم چه خیالست
هرچند روم سر به هوا ریشه سوارم
чун нахал сар ва бараг ғарурм ча хиоласт
ҳарачанд рум сар ба ҳаво риша саворм
رنگ پر طاووس ندارد غم پرواز
درکارگه آینه خفتهست بهارم
ранг пур товавас надорад ғам паравоз
даракорага оина хафта-ст бҳорм
در چشم کسان میکنم از دور سیاهی
خورشیدم و آیینهٔ تحقیق ندارم
дар чашм касон мӣ-канам аз дур сиоҳи
хурашидам ва оина таҳақиқ ндорм
زان پیش که آید به جنون ساغر هستی
مینا به دل سنگ شکستهست خمارم
зон пиш ки ойд ба ҷанун соғар ҳастӣ
мино ба дил санг шакаста-ст хаморм
در وصل ز محرومی دیدار مپرسید
آیینه نفهمیدکه من با که دچارم
дар васал з маҳаруми дидор мапарсид
оина нафаҳамидака ман бо ки дачорм
چون رشتهٔ تسبیح خورم غوطه به صد جیب
تا سر به هوایی که ندارم به در آرم
чун рашта тасабиҳ-хурм ғута ба сад ҷиб
то сар ба ҳавойай-ки ндорм ба дар орм
کس قطره کند تحفهٔ دریا چه جنون است
دل پیشکشت گر همه عذر است نیارم
кас қатара-канд таҳафа дарё ча ҷанун аст
дил пишакашт-гар ҳама ъазар аст ниорм
شاید به نگاهیکندم شاد و بخواند
مکتوب امیدم برسانید به یارم
шойд ба нгоҳи-кандам шод ва бахонд
мактуб амидам барсонид ба йорм
افسردگیگل نکشد آفت چیدن
بیدل چقدر گردش رنگست حصارم
афасардаги-гул накашад офт чидан
бидел чақадар гардаш рангаст ҳасорм
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- نقش
- تصویر و اثر؛ گاه صورت ظاهری در برابر حقیقت.
- خیال
- صورت ذهنی و وهم؛ جهان تصور در برابر حضور عینی.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- پرواز
- اوجگرفتن در هوا؛ نمادِ رهاییِ روح و آرزو.