بهار صنع چو دیدیم در سر و کارش
بهار صنع چو دیدیم در سر و کارش
به رنگ رفته نوشتم براتگلزارش
бҳор санаъ чу дидим дар сар ва кораш
ба ранг рафта нушатам барот-галазораш
به آسمان مژهٔ من فرو نمیآید
بلند ساختهٔ حیرتیست دیوارش
ба осмон мажа ман фару нами-ойд
баланд сохта ҳирти-ст дивораш
رهایی ازکف صیاد عشق ممکن نیست
کمند جای نفس میکشدگرفتارش
раҳойай азакаф сиод ишқ мамакан нест
каманд ҷой нафас мӣ-кашадагарафтораш
به خاک خفتهٔ دام تواضع خلقم
چو سجدهای که فتد راه در جبین زارش
ба хок хафта дом тавозаъ халқам
чу саҷада-эй ки фатад ро дар ҷабин зораш
به وضع خلق برآیا ز دهرگوشهگزین
گهر سریست که دربا نمیکشد بارش
ба вазаъ халқ баройо з даҳарагуша-газин
гаҳар сари-ст ки дарабо нами-кашад бораш
ز شیخ مغز حقیقت مجوکه همچو حباب
سری ندارد اگر واکنند دستارش
з ших мағаз ҳақиқат маҷука ҳамачу ҳабоб
сари надорад агар вокананд дастораш
ندارد آن همه تعلیم هوش غفلت عام
به راه خفته به پا میکنند بیدارش
надорад он ҳама таъалим ҳуш ғафалат ъом
ба ро хафта ба по мӣ-кананд бидораш
چو شمع بلبل ا:ن باغ بسکه عجز نماست
شکستن پر رنگ است سعی منقارش
чу шамъ балабал а:н боғ басака ъаҷаз намост
шакастан пур ранг аст саъи манқораш
خرام یار ز عمر ابد نشان دارد
در آب خضر نشستهست گرد رفتارش
харом йор з умр абд нашон дорад
дар об хазар нашаста-ст гард рафтораш
ادب ز شرم نگه آب میشود ورنه
شنیدهایم که بیپرده است دیدارش
адаб з шарм нга об мӣ-шуд варна
шанида-айам ки бе-парда аст дидораш
ره جنونکدهٔ دل گرفتهای بیدل
به پا چو آبله نتوان نمود هموارش
ра ҷанунакада дил гарфата-эй бидел
ба по чу обала натавон намуд ҳамавораш
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- بهار
- فصلِ شکوفایی؛ نمادِ جوانی، تازگی و جلوهٔ حسن.
- عشق
- مهرِ سوزان؛ نیرویِ بنیادینِ هستی و راهِ فنا.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- گرد
- غبار و خاک؛ نشانه محوی، ناپایداری و حجاب دیدن.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- راه
- مسیرِ رفتن؛ نمادِ طریقتِ سلوک و سفرِ معنوی.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.