آخر ز فقر بر سر دنیا زدیم پا
آخر ز فقر بر سر دنیا زدیم پا
خلقی به جاه تکیه زد و ما زدیم پا
охар з фақар бар сар данио-здим по
халқи ба ҷо такиа зд ва мо здим по
فرقی نداشت عزت و خواری در این بساط
بیدار شد غنا، به طمع تا زدیم پا
фарақи ндошт ъазат ва хори-дар ин басот
бидор шуд ғано, ба тамаъ то здим по
از اصل دور ماند جهانی به ذوق فرع
ما هم یک آبگینه به خارا زدیم پا
аз асал-дур монд ҷаҳони ба зуқ фараъ
мо ҳам як обагина ба хоро здим по
عمریست طعمهخوار هجوم ندامتیم
یارب چرا چو موج به دریا زدیم پا
ъамари-ст-таъама-хор ҳаҷум ндоматим
йораб чаро чу мавҷ ба дарё здим по
زین مشت پر که رهزن آرام کس مباد
بر آشیان الفت عنقا زدیم پا
зин машт пур ки раҳазн ором кас мабод
бар ошион алафт ъанқо здим по
قدر شکست دل نشناسی ستمکشیست
ما بیخبر به ریزهٔ مینا زدیم پا
қадар шакаст дил нашаноси сатамакаши-ст
мо бе-хабар ба риза мино здим по
طی شد به وهم عمر، چه دنیا چه آخرت
زین یک نفس تپش به کجاها زدیم پا
ти шуд ба ваҳм умр, ча данио ча охарт
зин як нафас тапаш ба каҷоҳо здим по
مژگان بسته سیر دو عالم خیال داشت
از شوخی نگه به تماشا زدیم پا
мажагон баста сир ду олам хаёл дошт
аз шухи нга ба тамошо здим по
شرم سجود او عرقی چند ساز کرد
کز جبههسودنی به ثریا زدیم پا
шарм саҷуд ав ъарақи чанд соз кард
каз ҷабҳа-судани ба сарио здим по
واماندگی چو موج گهر بیغنا نبود
بر عالمی ز آبلهٔ پا زدیم پا
вомонадаги чу мавҷ гаҳар бе-ғано набуд
бар ъолми з обала по здим по
چون اشک شمع در قدم عجز داشتیم
لغزیدنی که بر همه اعضا زدیم پا
чун ашак шамъ дар қадам ъаҷаз доштим
лағазидани ки бар ҳама аъазо здим по
بیدل ز بس سراسر این دشت کلفت است
جز گرد برنخاست به هرجا زدیم پا
бидел з бас саросар ин дашт калафт аст
ҷуз гард барнахост ба ҳараҷо здим по
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- موج
- برآمدگی آب؛ در شعر نشانه جنبش، اضطراب و ناپایداری.
- شکست
- درهمشکستگی؛ نمادِ نیستی و فروریختنِ خودیِ عاشق.
- خیال
- صورت ذهنی و وهم؛ جهان تصور در برابر حضور عینی.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- اشک
- قطرهٔ چشم؛ نشانهٔ گریه، شوق یا اندوهِ عاشقانه.
- مژگان
- موهای پلک؛ نمادِ تیرِ نگاه و گریهٔ عاشق.
- گرد
- غبار و خاک؛ نشانه محوی، ناپایداری و حجاب دیدن.
- وهم
- پندار ناپایدار؛ ادراکی که یقین و حقیقت کامل نیست.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.