هیهات دم بازپسین عرض ادب برد
هیهات دم بازپسین عرض ادب برد
رشک نفسم سوخت که نام تو به لب برد
ҳиҳот дам бозапасин ъарз адаб бард
рашак нафасам сухт-ки ном ту ба лаб бард
بر عالم فطرت دل بیدرد ستم کرد
نشکستن این شیشه قیامت به حلب برد
бар олам фтарт-дил бе-дард сатам кард
нашакастан ин шиша қиёмат ба ҳалаб бард
فرصت نرسانید به مقصد نفسم را
این شمع پیام سحری داشت که شب برد
фарсат нарсонид ба мақасад нафасам ро
ин шамъ пиом саҳари дошт-ки шаб бард
ای غنچه دو دم تنگی دل مغتنم انگار
زین غمکده هرگاه الم رفت طرب برد
эй ғанача ду дам танги дил мағатанам ангор
зин ғамакада ҳараго алм рафт тараб бард
فریاد که بی مطلبی پیش نبردم
همت خجلم کرد ز جایی که طلب برد
фариод ки бе-маталаби пиш набардам
ҳамат хаҷалм-кард з ҷойай-ки талаб бард
چون شمع به بیماری دل ساخته بودم
فرصت به تکلف عرقی کرد که تب برد
чун шамъ ба бимори дил сохта будам
фарсат ба такалаф ъарақи-кард ки таб бард
قاصد، نشوی منفعل لغزش مستان
خواهد همه جا نامهٔ ما برگ عنب برد
қосад, нашавай манафаъал лағазаш мастон
хоҳад ҳама ҷо нома мо бараг ъанаб бард
درد طلب عشق در آفاق که دارد
کم نیست که لیلی غم مجنون به عرب برد
дард талаб ишқ дар офоқ-ки дорад
кам нест-ки лили ғам маҷанун ба ъараб бард
گر مرگ نمیبود غم خلق که میخورد
صد شکر که اینجا همهکس روز به شب برد
гар-мараг нами-буд ғам халқ-ки мӣ-хурд
сад шакар ки инҷо ҳама-кас рӯз ба шаб бард
این آدم وحوا شرف نسبت هستی است
بیدل نتوان پیش عدم نام نَسَب برد
ин одам ваҳаво шарф насабат ҳастӣ аст
бидел натавон пиш ъадам ном насаб бард
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- عشق
- مهرِ سوزان؛ نیرویِ بنیادینِ هستی و راهِ فنا.
- لب
- کنارهٔ دهان؛ نمادِ سخن، بوسه و حیاتِ معشوق.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.
- دم
- نفس یا لحظه؛ واحدی بسیار کوتاه از زمان و زندگی.
- عرض
- ویژگی ناپایدار شیء؛ در برابر جوهر و ذات.
- فرصت
- مجال کوتاه انجام کار؛ در شعر غالبا لحظه گذرای عمر.
- درد
- رنج و الم؛ سرمایهٔ عاشق و راهِ پختگیِ جان.
- شیشه
- ظرفِ بلورین؛ نمادِ شکنندگیِ دل و صفای جان.
- غنچه
- گُلِ نشکفته؛ نمادِ دلِ بسته، رازِ نهفته و دهانِ خاموش.
- خلق
- مردمان یا خوی و سرشت؛ جهانِ کثرت در برابرِ تنهایی.
- طلب
- جُستن و خواستن؛ کششِ سالک در پیِ حق و معشوق.
- غم
- اندوه؛ سرمایهٔ دلِ عاشق و همدمِ شبهای تنهایی.